आनंद मुसाफ़िर

जिन्दगी है कुछ तो मोहब्बत के सिवा भी

हम क्यों हों उदास जो मिले कुछ लोग बेवफा भी

न तो हमीं से शुरू हुआ है, न होगा हमीं पे खत्म

है वफा गर दुनिया में रहेगा बेवफाई का सिलसिला भी

कत्अ

इक हसीन परदा है अभी मेरी आंखों के आगे

यह परदा हटेगा तो दुनिया नजर आएगी

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